Monthly Archives: November 2014

मेरे सपनो का भारत

गौर से देख मुझे मैं वही हूँ जिसके सारे अधिकारों को तूने नकारा आज मेरे ही हाथों रचित संविधान को तूने है स्वीकारा। पता है मुझे – २ संविधान को स्वीकारना यह तेरा एक खेला है तेरा समाज तो बरसो … Continue reading

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